बंद करने से आंखे ,मंज़र बदला नहीं करते ,
कहने बस से आसमान , झुका नहीं करते..
चाहत है गर कुछ , कर गुजरने की ,
तो हौसले कभी कम हुआ नहीं करते...
पहचानो खुद को , अपनी काबिलियत को समझो ,
की समय भी हर बार परीक्षा लिया नहीं करते....
ठान लो कुछ करने की , तो बिना किये दम न लेना,
क्यूंकि मौके हमेशा मिला नहीं करते....
करो संकल्प की पाना है " मुझे मंजिल को ",
तब तक़दीर भी राहें रोका नहीं करती....!!!!
कहने बस से आसमान , झुका नहीं करते..
चाहत है गर कुछ , कर गुजरने की ,
तो हौसले कभी कम हुआ नहीं करते...
पहचानो खुद को , अपनी काबिलियत को समझो ,
की समय भी हर बार परीक्षा लिया नहीं करते....
ठान लो कुछ करने की , तो बिना किये दम न लेना,
क्यूंकि मौके हमेशा मिला नहीं करते....
करो संकल्प की पाना है " मुझे मंजिल को ",
तब तक़दीर भी राहें रोका नहीं करती....!!!!
manzilen door hi hone ka guma sa lage,
ReplyDeleteraah chalte hue raahin me dhua sa lage.
khud me rakhna hausla kuch yu ae dost,
ki us aaftaab ka hausla tera hausla sa lage.
kya baat hai.. :) GC
Deleteकरो संकल्प की पाना है " मुझे मंजिल को ",
ReplyDeleteतब तक़दीर भी राहें रोका नहीं करती....!
बिलकुल सही... खूबसूरत अभिव्यक्ति!
thanks madhuresh.. :)
Delete:) Hey, poetry mein interest hai aur blog pe sirf ek hi poem!.. wish to read more from you.. keep penning... :)
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